NIA ने अमरोहा और दिल्ली के जाफ़राबाद के बीच क्या कनेक्शन पाया? - ग्राउंड रिपोर्ट

सर्दियां आते ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़े जाफ़राबाद में चहल-पहल बढ़ जाती है क्योंकि यह भारत का जैकेट का मशहूर मार्केट है.

बुधवार तड़के 26 दिसंबर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के छापों ने इस इलाक़े को चर्चा में ला दिया.

एनआईए ने सुबह क़रीब साढ़े चार बजे छापेमारी करके इस इलाक़े से पांच लोगों को गिरफ़्तार किया. बाद में एनआईए ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा कि उसने उत्तर प्रदेश और दिल्ली की तकरीबन 17 जगहों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

एनआईए का कहना है कि ये सभी लोग आईएसआईएस से प्रभावित संगठन हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम नामक मॉड्यूल से जुड़े हुए थे जिसका मास्टरमाइंड मुफ़्ती सुहैल है और यह देश भर में हमले की तैयारी कर रहा था.

मुफ़्ती सुहेल को उत्तर प्रदेश के अमरोहा से गिरफ़्तार किया गया है. वह वहाँ एक मदरसे में मुफ़्ती थे.

29 साल के मुफ़्ती सुहैल जिन्हें लोग 'हज़रत' कहते हैं, वे यहीं जाफ़राबाद में पले-बढ़े थे और तकरीबन डेढ़ महीने पहले वो अमरोहा अपने पुश्तैनी घर में रहने चले गए थे.

जाफ़राबाद के चौहान बांगर में जब हम उनके घर पहुंचे तो तीन मंज़िला इमारत की पहली मंज़िल से झांकते हुए एक शख़्स ने हमारे सामने हाथ जोड़ लिए.

उनसे पूछा तो पता चला कि वह मुफ़्ती सुहैल के बड़े भाई मोहम्मद जुनैद हैं. जुनैद ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं बोलेंगे और वह बेहद परेशान हैं. इस दौरान पड़ोस के कुछ लोग भी इकट्ठा हो गए और नाराज़गी के साथ पूछने लगे कि इस घर के लोगों को क्यों परेशान किया जा रहा है.

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मुफ़्ती सुहैल के पड़ोसियों का कहना है कि वह बेहद शरीफ़ हैं और गली में कभी भी उनका किसी से कोई झगड़ा नहीं हुआ.

सुहैल के पिता और उनके भाइयों का इन्वर्टर बनाने का काम है. सिर्फ़ घर में सुहैल ही थे जो अपने पारिवारिक धंधे को छोड़कर मुफ़्ती बने थे.

सुहैल के पड़ोसी मोहम्मद रिज़वान मीडिया पर अपना गुस्सा उतारते हुए कहते हैं, "हमारी गली के शरीफ़ बच्चे को आप मीडिया वालों ने बदनाम कर दिया. हमने उसे कभी ग़लत बात करते हुए नहीं सुना. घर से जो बैटरी बरामद होने की बात कही जा रही है, वह उनके काम से जुड़ी है क्योंकि उनके घर में इन्वर्टर का काम होता है जिसमें बैटरी इस्तेमाल होती है."

रिज़वान बताते हैं कि बुधवार तड़के अधिकारी यहां भी आए थे और सुहैल के घर की तलाशी ली थी. वह कहते हैं कि वे बाक़ायदा सोची-समझी रणनीति के तहत आ उन्होंने वीडियोग्राफ़ी भी की.ए और

एनआईए का आरोप है कि सुहैल ही विदेशी हैंडलर के साथ संपर्क में थे और वह लोगों को उनके समूह में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे. एनआईए के अनुसार, उन्होंने ग्रुप के दूसरे सदस्यों को हथियार और बारूद के इंतज़ाम का ज़िम्मा सौंपा था ताकि आईइडी और पाइप बम तैयार किए जा सकें.

गिरफ़्तार किए गए अधिकतर लोग 30 से कम ही उम्र के हैं लेकिन इनमें मोहम्मद आज़म की उम्र सबसे अधिक है. 35 वर्षीय आज़म जाफ़राबाद में ही एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं जो उन्होंने पांच साल पहले ही शुरू किया था.

जाफ़राबाद के एक फ़्लैट में जब हम उनके घर पर गए तो वहां ताला लटका हुआ मिला. पड़ोसियों ने बताया उनकी पांच वर्षीय बेटी और बीवी अपने मायके चली गई हैं.

जब हम आज़म के मेडिकल स्टोर पर गए तो वह बंद मिला लेकिन स्टोर जिस घर में था उसमें रहने वाले मोहम्मद सारिब ने कहा कि उन्हें इस घटना पर विश्वास ही नहीं हो रहा है क्योंकि आज़म बहुत शांत किस्म के थे और उन्होंने हमेशा हमसे प्यार से बात की.

आज़म पास में ही एक दूसरे मेडिकल स्टोर चलाने वाले मोहम्मद सलमान के जीजा हैं. मोहम्मद सलमान भी बाकियों की तरह अपने बहनोई को बेकसूर बताते हैं.

पड़ोसी उन्हें बेगुनाह बता रहे हैं और उनका कहना है कि यह गिरफ़्तारी केवल व्हाट्सऐप ग्रुप की वजह से हुई है. उनका कहना है कि वह भी उस ग्रुप में शामिल थे जो मुफ़्ती सुहैल चला रहे थे.

तकरीबन दो महीने पहले आज़म अपने परिवार के साथ उमरा करने सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे. लोगों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने धार्मिक रीति-रिवाजों के बारे में पता लगाने के लिए सऊदी अरब से सुहैल को कई बार कॉल किया था.

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