#Balakot जंगल में बम गिराते तो पाकिस्तान जवाबी हमला क्यों करता: वायुसेना प्रमुख धनोआ

भारतीय वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने सोमवार को पाकिस्तान में बालाकोट हमले से लेकर विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान और चरमपंथ के ख़िलाफ़ भारत के आगामी कदमों को लेकर बयान दिया है.

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में चरमपंथी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट इलाक़े में हमला किया था. भारत का कहना था कि उसने चरमपंथी संगठन जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया, हालाँकि पाकिस्तान भारत के इस दावे को नकारता है.

मीडिया में इस हमले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं और इन्हीं चर्चाओं के बीच वायुसेना प्रमुख ने कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब दिए.

भारतीय वायुसेना को जो लक्ष्य दिया गया था, उसे हिट किया गया. अगर हमने जंगलों में बम गिराए होते तो पाकिस्तान को प्रतिक्रिया देने की ज़रूरत क्यों होती. वायुसेना ये नहीं बता सकती कि हमले में कितने लोग मारे गए क्योंकि हम मरने वालों की संख्या नहीं गिनते. इस अभियान के बाद बम से होने वाले नुक़सान का आकलन कर लिया गया है. और मरने वालों की संख्या हमले के वक्त उस जगह पर मौजूद लोगों की उपस्थिति पर निर्भर करती है.

भारतीय वायुसेना के पास मिग - 21 बायसन है तो ऐसे में वायुसेना उनका इस्तेमाल क्यों नहीं करेगी. वायुसेना अभी भी अभियान चला रही है, ऐसे में ये नहीं कहूंगा कि हम किस-किस विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं. जहां तक मिग-21 विमान का सवाल है तो ये एक मजबूत विमान है, कुछ समय पहले इसे अपग्रेड किया गया है. इसमें एयर-टू-एयर मिसाइल, बेहतर रडार सिस्टम समेत इसमें वह सभी चीज़ें हैं, जो इसे तीसरी जैनरेशन के विमान से साढ़े तीन जैनरेशन के विमान में बदलती हैं. वायुसेना अपने पास मौजूद सभी विमानों का इस्तेमाल करती है.

विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को अपने प्लेन से इजेक्ट होना पड़ा था. वो फाइटर प्लेन की कॉकपिट में बैठेंगे या नहीं, ये उनकी मेडिकल फिटनेस पर निर्भर करेगा. अगर उन्हें किसी तरह के इलाज़ की ज़रूरत होगी तो उन्हें वह इलाज़ दिया जाएगा. इसके बाद उनकी मेडिकल फिटनेस सिद्ध होने के बाद ही वह लड़ाकू विमान उड़ा पाएंगे.

हम सामान्य रूप से इतनी जल्दी यूनिट चेंज नहीं करते हैं. जब तक वो रिकवर नहीं करते हैं तब तक वह लड़ाकू विमान नहीं उड़ा पाएंगे. मैं आपको बताना चाहता हूं कि मुझे भी एक बार प्लेन से निकलना पड़ा था और शरीर पर उसका गंभीर असर पड़ता है. अगर पहले इजेक्शन के बाद बॉडी रिकवर नहीं करती है और आप एक बार फिर इजेक्शन कर लें तो पायलट को पूरी ज़िंदगी व्हीलचेयर पर गुज़ारनी पड़ सकती है. ऐसे में हम एक फाइटर पायलट की फिटनेस पर चांस नहीं ले सकते.

आप जानते हैं कि फाइटर पायलट के चयन में भी असफ़लता का प्रतिशत बहुत ज़्यादा होता है क्योंकि हम उम्मीदवार की रीढ़ की हड्डी की स्थिति आदि की जांच करते हैं ताकि ये पता किया जा सके कि वह इजेक्शन को बर्दाश्त कर पाएगा या नहीं.

मुझे ये नहीं पता है कि पाकिस्तान और अमरीका के बीच एफ-16 विमानों को लेकर करार की शर्तें क्या हैं. अगर करार की शर्तों में ये शामिल है कि इन विमानों को आक्रामक गतिविधियों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है तो उन्होंने ज़रूर ही इन शर्तों का उल्लंघन किया है. क्योंकि हमें अपने क्षेत्र में एमराम मिसाइलों के टुकड़े मिले हैं जिन्हें हमने दिखाया भी है. मुझे लगता है कि उन्होंने हवाई संघर्ष में अपना एक एफ़-16 एयरक्राफ़्ट विमान खो दिया है. ऐसे में वे निश्चित ही हमारे ख़िलाफ़ एफ़-16 विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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